
dhyana yoga
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पातंजल योग दर्शन में असंप्रज्ञात समाधि
महर्षि पतंजलि ने समाधि को मुख्य रूप से दो उच्च अवस्थाओं में विभाजित किया है: संप्रज्ञात समाधि और असंप्रज्ञात समाधि। इनमें 'असंप्रज्ञात समाधि' योग की सर्वोच्च और अंतिम अवस्था है, जो सीधे कैवल्य (मोक्ष) की ओर ले जाती है।

पातंजल योग दर्शन में संप्रज्ञात समाधि
जब साधक ध्यान में गहरा उतरता है और उसका चित्त पूरी तरह से एकाग्र हो जाता है, तब वह 'समाधि' की अवस्था में प्रवेश करता है। महर्षि पतंजलि ने समाधि को मुख्य रूप से दो श्रेणियों में विभाजित किया है: संप्रज्ञात समाधि (Samprajnata Samadhi) और असंप्रज्ञात समाधि (Asamprajnata Samadhi)।

Difference between Japa and Sumiran
Explore the subtle distinction between mechanical Japa and heartfelt Sumiran, guiding the mind effortlessly into deep meditation (Dhyana).

अष्टांगयोग के पाँचवें अंग - प्रत्याहार
पतंजलि योगसूत्र एवं श्रीमद्भगवद्गीता के आलोक में प्रत्याहार (इन्द्रिय-प्रत्याहार) की गूढ़ व्याख्या, बहिर्मुखी मन को अन्तर्मुखी बनाने की वैज्ञानिक प्रक्रिया, प्राणायाम की सहायक भूमिका एवं पञ्चेन्द्रियों के विषय-निरोध का व्यावहारिक विवेचन।

साधना में एकांत का मार्ग - संत दादू दयाल की वाणी के आलोक में

Prem aur Vasna
A hindi poetry on difference between prem and vasna

The Art of Grounding: A Crucial First Step Toward Deep Meditation
Grounding for at least 15 minutes—without active thinking—is essential. If thoughts continue to arise, the chain of outward-directedness remains unbroken. Should persistent thoughts still intrude, a guided meditation can serve as a gentle anchor.

Song of Sanyasi By Swami Vivekananda
यह स्वामी विवेकानंद ने 1895 में USA में लिखी हुयी मूल अंग्रेजी कविता 'The Song of the Sanyasin' का सरल हिन्दी भावानुवाद है। यह बहुत सरल है जिसे साधारण से साधारण व्यक्ति जैसे, मजदूर से लेकर रिक्शेवाला और सब्जी बेचने वाले से लेकर कोई विद्वान भी समझ सकता है और अपनी भावना का नाता जोड़ सकता है; इसमें न तो शब्दों का आडंबर है और न ही विद्वत्ता का दिखावा।
तीर्थों का अध्यात्मिक महत्व
Due to the indiscriminate commercialization of teerths, it is now losing its spiritual aura.