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पातंजल योग दर्शन में संप्रज्ञात समाधि

पातंजल योग दर्शन में संप्रज्ञात समाधि

जब साधक ध्यान में गहरा उतरता है और उसका चित्त पूरी तरह से एकाग्र हो जाता है, तब वह 'समाधि' की अवस्था में प्रवेश करता है। महर्षि पतंजलि ने समाधि को मुख्य रूप से दो श्रेणियों में विभाजित किया है: संप्रज्ञात समाधि (Samprajnata Samadhi) और असंप्रज्ञात समाधि (Asamprajnata Samadhi)।

अक्षय तृतीया : सच्चा अक्षय क्या है? अद्वैत वेदांत की दृष्टि से विस्तृत लेख

अक्षय तृतीया : सच्चा अक्षय क्या है? अद्वैत वेदांत की दृष्टि से विस्तृत लेख

अद्वैत वेदांत स्पष्ट कहता है – ब्रह्म सत्यं, जगन्मिथ्या। इस जगत का हर पदार्थ क्षयशील है। सोना-चाँदी रूप, रंग, भार में बदलता है; शरीर बूढ़ा होकर मरता है; धन चोरी, कर, दुर्घटना या मृत्यु से नष्ट हो जाता है। इसलिए यह ‘क्षय’ है, ‘अक्षय’ नहीं।

Song of Sanyasi By Swami Vivekananda

Song of Sanyasi By Swami Vivekananda

यह स्वामी विवेकानंद ने 1895 में USA में लिखी हुयी मूल अंग्रेजी कविता 'The Song of the Sanyasin' का सरल हिन्दी भावानुवाद है। यह बहुत सरल है जिसे साधारण से साधारण व्यक्ति जैसे, मजदूर से लेकर रिक्शेवाला और सब्जी बेचने वाले से लेकर कोई विद्वान भी समझ सकता है और अपनी भावना का नाता जोड़ सकता है; इसमें न तो शब्दों का आडंबर है और न ही विद्वत्ता का दिखावा।